मैं कोई नौटंकी तो नहीं
लोगों को खुश रखना अब, यह मेरी फितरत में नहीं। बहुत संभाले जग के रिश्ते, मैं कोई नौटंकी तो नहीं। हर बार किसी का हाथ पकड़, मैं राह दिखाने क्यों आऊं। मेरी भी अपनी मंजिल है, मैं कोई नौटंकी तो नहीं। अब मैं खुद को अपने तक, सीमित करना चाह रहा हूं। मैं सब में शामिल क्यों हूं, मैं कोई नौटंकी तो नहीं।