वक्त बदला मगर ,वक्त फिर वो नहीं। तुम करीब थे कभी, आज दूरी हुई । रोजी-रोटी के चक्कर में, दब सा गया। वो गुलाबों की खुशबू, भी फीकी हुई। वक्त बदला मगर, वक्त फिर वो नहीं। तुम करीब थे कभी ,आज दूरी हुई। शौक था घर बनाऊं ,बना भी लिया। बिन तुम्हारे बस , कमरे की जोड़ी हुई। नौकरी की कशिश थी, मिली तो मगर। अपनों से दूर होना, ये मजबूरी हुई । वक्त बदला मगर, वक्त फिर वो नहीं। तुम करीब थे कभी, आज दूरी हुई।
संदेश
जून, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
जीवन एक कुरुक्षेत्र बन गया, मैं अर्जुन बन भटक रहा हूं, गीता का फिर पाठ सुनाकर, तुमको राह दिखाना होगा, कृष्णा तुम्हें फिर आना होगा। दुनिया की यह भीड़ नहीं, मुझे कृष्ण ही केवल चाहिए तुम्हें सारथी बन कर के फिर, मेरा रथ तो चलाना होगा , कृष्णा तुम्हें फिर आना होगा। कुछ धुन्ध सा छाया जीवन में, महाभारत के रण के जैसे, सब अपने जैसे तो लगते हैं, पर सच तुमको दिखलाना होगा, कृष्णा तुम्हें फिर आना होगा।
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
गिर गिर के जो उठा है, वो मंजिल को पा गया। जो डर गया वहीं तो आज पीछे रह गया । डरना नहीं तुम्हें कसम, तुम्हें भी चलना है। ठोकर लगे अगर कभी उठ दौड़ पड़ना है । तुम हो भविष्य देश के,देश के हो वीर । झुकने नहीं देना कभी, माता का अपने सिर। जिद पे अपने डिगे रहो ,मंजिल को पाओगे। आज अश्क है मगर, कल मुस्कुराओगे । दर्द को भी जिसने, अपना हथियार बनाया। इतिहास भी उसी का तलब गार बन गया। जो डर गया वही तो ,आज पीछे रह गया। गिर गिर के जो उठा है वो मंजिल को पा गया। जो डर गया वही तो आज पीछे रह गया ।
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
तेरी मेरी कहानी में, अजब सा मोड़ आया है। तुम शिकवे दिल में रखते हो , तुम्हें मैं दिल में रखता हूं । चले थे साथ में हम तुम, जब तक ना मोड़ आया था। तुम्हें शोहरत की हसरत है, मेरी हसरत तो तुम तक है । तेरी मेरी कहानी में, अजब सा मोड़ आया है । तुम शिकवे दिल में रखते हो, तुम्हें मैं दिल में रखता हूं। तेरे हर नाज भी हमने, खुद से ज्यादा संभाला है। तुम्हें गैरों से मिल करके, बड़ा आराम आता है। मगर मेरी हर धड़कन में, तुम्हारा नाम आता है। तुम शिकवे दिल में रखते हो, तुम्हें मैं दिल में रखता हूं। तेरी मेरी कहानी में, अजब सा मोड़ आया है ।
पग संभल के रखना पड़ेगा
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
जीवन के रास्ते कठिन तो बहुत है, मगर पग संभल के रखना पड़ेगा । यह कुरुक्षेत्र है धर्म की है लड़ाई, तुम्हें हर अधर्मी से लड़ना पड़ेगा । अपने समय को गंवाने से पहले, जरा दिल में कल की तस्वीर सोचो । मंजिल की चाहत अगर दिल में तेरे, तुझे कंकड़ों पर भी चलना पड़ेगा । जीवन के रास्ते कठिन तो बहुत हैं, मगर पग संभल के रखना पड़ेगा।
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
खुद को बड़ा सयाना, तुम समझने लगे हो। दूजों का हक दबाकर, क्यों रखने लगे हो । भूखे बच्चों के निवाले तक, न छोड़ते हो तुम। कुत्तों के जैसी फितरत, क्यों रखने लगे हो। घमंड इस शरीर का, तुम इतना कर रहे । सांसे भी उसके रहम की, तुम हर पल जी रहे। एक पल में सांस अटकेगी, बस तड़फाओगे । अपने हर किए कर्म को, तुम जी के जाओगे । क्यों भर रहे घड़ा तुम, हर रोज पाप का । खुद को ईश्वर से ज्यादा, तुम समझने लगे हो। दूजों का हक दबाकर, क्यों रखने लगे हो।
तृप्त मधुशाला के द्वार है
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
भूखे को भोजन नहीं,भरे को भंडार है। प्यासे को पानी नहीं, तृप्त मधुशाला के द्वार है। दुनिया के अन्दर बाहर ,लगा अजूबा हर बार है। मैं हर बार समझकर भी, नासमझ हो जाता हूं। गिन गिन कर थक जाता हूं, इसके रंग हजार है। पाप पुण्य का लेखा जोखा, लगता है उलट गया। सत्य जलालत में जीता, झूठे को स्वर्णिम हार है । प्यासे को पानी नहीं, तृप्त मधुशाला के द्वार हैं ।