सच की आड़ में
सच की आड़ में ही तो,
झूठ पनपता होगा।
चाहत को पाने की खातिर,
ईष्या का बीज भी उपजा होगा ।
सुख के दिन जब आते हैं तो,
दर्द की आहट भी होगी।
सुबह के आंचल में ही तो,
रात भी सिमटी होगी।
जीने की उम्मीद में ही,
मृत्यु को आना होगा ।
सच की आड़ में ही तो,
झूठ पनपता होगा।
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