संदेश

 अपनी किस्मत में तारे सजाएं       दृढ़ इच्छा का दीपक जलाए  सपनों को सच करना अगर है, शिक्षा से रिश्ता अपना बनाएं  किताबों से दिल जो लगेगा, कामयाबी का सेहरा सजेगा। लाख मिल जायेंगे दिल बिछाए, जिनके पीछे तू मजनूं बना ‌है। अपनी हिम्मत को अब आजमाएं  दृढ़ इच्छा का दीपक जलाएं। जब मोबाइल से दूरी बनेगी, राह किताबों की ओर मुड़ेगी। गर जमाने से बढ़ना है आगे, रात को दिन बनाना पड़ेगा। दृढ़ इच्छा का दीपक जलाएं, अपनी किस्मत में तारे सजाएं। सपनों को सच करना अगर है, शिक्षा से रिश्ता अपना बनाएं।
 उठो नारियों खुद को जगाओ, पग पग पर तुम्हें संभालना होगा। बार-बार अब इस धरती पर,  श्री कृष्ण  नहीं  आने   वाले। अपनी चीर बचाने की खातिर, खुद  तुमको लड़ना  होगा। चुपचाप सहन करना ना कभी,  हर  मोड़ पे दुष्ट  दुशासन है। अब दुष्ट दुशासन के सीने से, प्राण  तुम्हें  हरना  होगा। उठो नारियों खुद को जगाओ, पग पग पर तुम्हें संभालना होगा।

टिंकू सियार

 एक रोज कागज के टुकड़े, घर ले आया टिंकू सियार। राशन कार्ड बताया उसको, सच मान गई बीबी गंवार। बाल बच्चों को संग लेकर,  चले  खेत  को   चरने। कार्ड गले में लटका कर, लगे   पेट   को  भरने। भौ भौ कुत्ते की सुन, हाफने लगे मिस्टर सियार। बीबी बोली क्यों डरते हो, पास हमारे कार्ड है चार। बच्चे लेकर भाग चलो तुम, वरना पड़ जायेगी मार। कार्ड पढ़ना नहीं आता इनको, ये कुत्ते हैं अनपढ़ गंवार।

चूहे जी चले ससुराल

 चूहे जी चले ससुराल,  पहन के ऐनक, सूट और टाई , बारिश के रिमझिम,मौसम में, चले कूदते नाली नाला। बीच बाजार लिए रसगुल्ला , चल दिए करते हल्ला-गुल्ला। मचल उठे रसगुल्ला देख,  खाते चल दिए खुल्लम-खुल्ला। घंटे भर की मेहनत से, खाली हाथ पहुंचे ससुराल। साली उनकी बोली जीजा,  मिठाई क्या नहीं खरीदा। मुंह बिचका कर बोले जीजा, बारिश की थी बल्ले बल्ले,  नाली में गिर पड़े रसगुल्ले।

मुझे लगा तुम आए

 चिड़ियों ने जब-जब भी मधुरिम,     गीत सुबह के गाए , और हवाओं ने भी धीरे, सरगम मधुर बजाए, मुझे लगा तुम आए। जीवन की तंग गलियों में,  कभी जब याद तुम आए, और तुम्हारे ख्वाब हजारों,  मेरी नींद में आए, मुझे लगा तुम आए।  चैन नहीं घर में रहता है,  ना ही बाहर भाए, और तुम्हारे गीत नेह के, निश्चल झरने भी गाए, मुझे लगा तुम आए।  जब भी बेगानी राहों में,  तनहाइयां रुलाए, जब रातों में चुपके से,  यादों ने ख्वाब सजाए, मुझे लगा तुम आए।

दिल की क्या बात है

 दिल की क्या बात है,  हम उन्हें जान दे चुके।  उनकी एक निगाह को,  हर अरमान दे चुके।  अक्सर ही पूछते हैं लोग, क्यों खामोश से हो तुम।  क्या बताएं हम उन्हें, हर एक अंजाम दे चुके। ना खुद के पास हैं, ना जहां में ही शायद।  उनकी एक मुस्कान को,  यह इनाम दे चुके।  दिल की क्या बात है,  हम उन्हें जान दे चुके।

गजल

 ख्वाहिशें मिट गई जहां की मनमानी में ।   वो बेवा बन गई भरी जवानी में ।। सुलगती है एक आग सी सीने में कहीं। धुआं धुआं सा लग रहा जिंदगानी में।। वो बेवा बन गई भरी जवानी में। मुमकिन न हुआ फिर चेहरे पे तबस्सुम।  दर्द ही मिलते रहे उसे हर रवानी में।। वो बेवा बन गई भरी  जवानी में। रूह की आवाज दब कर रह गई । खामोशी हमसफर बनी हर कहानी में।। उजड़े चमन सा लगता है चेहरा उसका।  नूर गुम गया जैसे किसी विरानी में।। वो बेवा बन गई भरी जवानी में।