मुझे लगा तुम आए
चिड़ियों ने जब-जब भी मधुरिम,
गीत सुबह के गाए ,
और हवाओं ने भी धीरे,
सरगम मधुर बजाए,
मुझे लगा तुम आए।
जीवन की तंग गलियों में,
कभी जब याद तुम आए,
और तुम्हारे ख्वाब हजारों,
मेरी नींद में आए,
मुझे लगा तुम आए।
चैन नहीं घर में रहता है,
ना ही बाहर भाए,
और तुम्हारे गीत नेह के,
निश्चल झरने भी गाए,
मुझे लगा तुम आए।
जब भी बेगानी राहों में,
तनहाइयां रुलाए,
जब रातों में चुपके से,
यादों ने ख्वाब सजाए,
मुझे लगा तुम आए।
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