उठो नारियों खुद को जगाओ, पग पग पर तुम्हें संभालना होगा। बार-बार अब इस धरती पर, श्री कृष्ण नहीं आने वाले। अपनी चीर बचाने की खातिर, खुद तुमको लड़ना होगा। चुपचाप सहन करना ना कभी, हर मोड़ पे दुष्ट दुशासन है। अब दुष्ट दुशासन के सीने से, प्राण तुम्हें हरना होगा। उठो नारियों खुद को जगाओ, पग पग पर तुम्हें संभालना होगा।
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सितंबर, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
टिंकू सियार
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एक रोज कागज के टुकड़े, घर ले आया टिंकू सियार। राशन कार्ड बताया उसको, सच मान गई बीबी गंवार। बाल बच्चों को संग लेकर, चले खेत को चरने। कार्ड गले में लटका कर, लगे पेट को भरने। भौ भौ कुत्ते की सुन, हाफने लगे मिस्टर सियार। बीबी बोली क्यों डरते हो, पास हमारे कार्ड है चार। बच्चे लेकर भाग चलो तुम, वरना पड़ जायेगी मार। कार्ड पढ़ना नहीं आता इनको, ये कुत्ते हैं अनपढ़ गंवार।
चूहे जी चले ससुराल
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चूहे जी चले ससुराल, पहन के ऐनक, सूट और टाई , बारिश के रिमझिम,मौसम में, चले कूदते नाली नाला। बीच बाजार लिए रसगुल्ला , चल दिए करते हल्ला-गुल्ला। मचल उठे रसगुल्ला देख, खाते चल दिए खुल्लम-खुल्ला। घंटे भर की मेहनत से, खाली हाथ पहुंचे ससुराल। साली उनकी बोली जीजा, मिठाई क्या नहीं खरीदा। मुंह बिचका कर बोले जीजा, बारिश की थी बल्ले बल्ले, नाली में गिर पड़े रसगुल्ले।
मुझे लगा तुम आए
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चिड़ियों ने जब-जब भी मधुरिम, गीत सुबह के गाए , और हवाओं ने भी धीरे, सरगम मधुर बजाए, मुझे लगा तुम आए। जीवन की तंग गलियों में, कभी जब याद तुम आए, और तुम्हारे ख्वाब हजारों, मेरी नींद में आए, मुझे लगा तुम आए। चैन नहीं घर में रहता है, ना ही बाहर भाए, और तुम्हारे गीत नेह के, निश्चल झरने भी गाए, मुझे लगा तुम आए। जब भी बेगानी राहों में, तनहाइयां रुलाए, जब रातों में चुपके से, यादों ने ख्वाब सजाए, मुझे लगा तुम आए।
गजल
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ख्वाहिशें मिट गई जहां की मनमानी में । वो बेवा बन गई भरी जवानी में ।। सुलगती है एक आग सी सीने में कहीं। धुआं धुआं सा लग रहा जिंदगानी में।। वो बेवा बन गई भरी जवानी में। मुमकिन न हुआ फिर चेहरे पे तबस्सुम। दर्द ही मिलते रहे उसे हर रवानी में।। वो बेवा बन गई भरी जवानी में। रूह की आवाज दब कर रह गई । खामोशी हमसफर बनी हर कहानी में।। उजड़े चमन सा लगता है चेहरा उसका। नूर गुम गया जैसे किसी विरानी में।। वो बेवा बन गई भरी जवानी में।
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बेटी बेटा के संग मिलकर कर लो अब टेट तैयारी। वरना अब नौकरी के दिन, हो जायेगा भारी। एक घंटे की रोज पढ़ाई, उन्नति ले आयेगा। किताबों का ज्ञान तुम्हें टेट उत्तीर्ण करायेगा। रोज रोज डर कर जीना अच्छी बात नहीं है। टेट परीक्षा उत्तीर्ण कर, खुद का विश्वास जगाओगे। समाज के मुंह पर भी, एक तमाचा लगाओगे। दो वर्ष का समय मिला, लगा दो हिम्मत सारी बेटी बेटा के संग मिलकर कर लो टेट तैयारी।
घर से निकल गया
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अपना वजूद ढूंढने घर से निकल गया। रास्ते के ठोकरों से कई बार लड़ गया। मुश्किल सफर था मगर ये एतबार था। मंजिलों को भी कुछ मुझसे प्यार था। मंजिल से मिलने वास्ते घर से निकल गया। अपना वजूद ढूंढने घर से निकल गया। लोगों ने मेरे वास्ते छोड़ा नही कुछ भी, मैं भी डटा रहा कि हासिल करके जाऊंगा। अपनी इसी एक जिद में,अपनो से लड़ गया। अपना वजूद ढूंढने घर से निकल गया रास्ते के ठोकरो से कई बार लड़ गया।
औरत
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दीवारों से घिरी दहलीजों की, लक्ष्मण रेखा में रहने वाली। सर पर घूंघट सम्मान का रख, सबको खुशियां देने वाली। भूख लगे पर खुद न खाकर सबसे पहले परिवार खिलाती। आज अपने घर की ओट से, देख रही बिटिया को बढते। खुद ही खुद को सम्मानित कर, उसकी अभिलाषा तृप्त हो जाती। टूटे समाज के बंधन देख, अंधेरी राहों को प्रकाश मिल गया। अपनी मर्जी अपनी इच्छा से उड़ने को आकाश मिल गया।