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कढी

 पकौड़ी--बेसन, हल्दी, जीरा,प्याज सोडा मिर्च ,नमक काली मिर्च, जीरा सूखी धनिया मिर्च नमक पीसकर मसाला बना ले  मेथी। का तड़का देकर मसाला भून ले  दही बेसन फेटकर पका ले  पकौड़ी डालेंगे  हींग और कड़ी पत्ता से छौक लगेगा 

सच बोल जाते हो

 अगर तुम भूल कर भी, कभी सच बोल जाते हो ।  अकेले जीने का रस्ता, तुम फिर खोल जाते हो  । यहां झूठी फरेबी बात ही, अच्छी मधुर लगती । तुम्हारे सच की आहट से, दुनिया भाग जाती है । जमाना उस किनारे है, जहां बहरों की दुनिया । अगर तुम सच सुनाओगे, बेचारे सुन नहीं सकते । वहां जाकर भी खुद को तुम अकेला ही तो पाते हो । रिश्तो की चाहत में, हमेशा मुंह की ही खाते हो । अकेले जीने का रस्ता, तुम फिर से खोल जाते हो। अगर तुम भूल कर भी कभी सच बोल जाते हो। अकेले जीने का रस्ता, तुम फिर खोल जाते हो ।
 हीरे की चमक हम भी पहचानते तो है,  वैसे हम पत्थरों के खरीददार नहीं हैं । सामने कुछ और है, पीछे का हाल और,  इंसान का हर रूप हम पहचानते तो हैं।  वैसे हमारा उनसे सरोकार नहीं है । हीरे की चमक हम भी पहचानते तो है,  वैसे हम पत्थरों के खरीददार नहीं हैं। जब से समझ आया जमाने का ये फरेब, चेहरे पे नकाब डालकर चलने लगे हैं हम। वैसे हमारा अब यहां कोई यार नहीं है । हीरे की चमक हम भी पहचानते तो है, वैसे हम पत्थरों के खरीददार नहीं है ।
   तेरे रसूख से नहीं कुछ काम चाहिए। जिंदा अगर हूं खुद का मेरा नाम चाहिए। मैं चल रहा हूं रेंग कर चलने तो दीजिए । मुझको भी मेरे खुद की एक पहचान चाहिए। जिंदा अगर हूं खुद का मेरा नाम चाहिए। रग रग में जोश है मेरे कायर नहीं हूं मैं। मुझको भी मुट्ठी भींच कर लड़ने तो दीजिए । इतिहास में मुझे भी मेरा काम चाहिए। जिंदा अगर हूं खुद का मेरा नाम चाहिए। मेरी भी अपनी सोच है मेरे भी कुछ वसूल। अपनी नसीहतों को अब रहने भी दीजिए। मेरे हुनर को भी अपना कुछ इनाम चाहिए । जिंदा अगर हूं खुद का मेरा नाम चाहिए। तेरे रसूख से नहीं कुछ काम चाहिए। जिंदा अगर हूं खुद का मेरा नाम चाहिए।

बच्चों में कफ की अधिकता

 श्रृंग भस्म एक रत्ती  रस सिंदूर आधी रती अभ्रक भस्म एक रत्ती  समीरपन्ग रस आधा रत्ती  सितोपलादि चूर्ण 1 ग्राम मिलाकर  शहर से सुबह शाम दे

तुम हमसफर हो तो

 तुम हमसफर हो तो, कोई डर नहीं । जिंदगी की हर मुश्किल आसान है। तुम पास हो तो, चैन से मैं जीता हूं। हर दिन जीवन में मेरे रविवार है। हर सोच तुमसे है, हर बात भी तुम्हीं से। जिंदगी में हर पल बिखरी मुस्कान है।  जिंदगी की हर मुश्किल आसान है। तुमसे मिलकर लगा, जन्मों का नाता है। जान से भी प्यारे हो, साथ तेरा भाता है। तुमसे ही तो जीवन के सारे अरमान है। जिंदगी की हर मुश्किल आसान है  । तुम हमसफर हो तो, कोई डर नहीं । जिंदगी की हर मुश्किल आसान है।
 गैस की दवा  100 ग्राम मनार का फूल  100 ग्राम काली मिर्च  100 ग्राम काला नमक  25 ग्राम टारटरी 100 ग्राम नौसादर
 युद्ध अगर जरूरी है, तो युद्ध होना चाहिए। युद्ध हो ,विकराल हो, ना की बार-बार हो । विषधरों का अब तो, बस फन कुचलना चाहिए । युद्ध अगर जरूरी हो, तो युद्ध होना चाहिए । सत्य के लिए  हमें,मिटना भी पड़े अगर । झूठ की तबाही ही, बस लक्ष्य होना चाहिए। युद्ध अगर जरूरी है ,तो युद्ध होना चाहिए । रोज सूनी हो रही, सिंदूर और गोद है । दुश्मनों का अब तो बस, अंत होना चाहिए। युद्ध अगर जरूरी है ,तो युद्ध होना चाहिए ।
 सिंदूर की कीमत  क्या होती,    ये तुमको आज बतायेंगे  । हम भारत मां के वीर  सपूत,  घर में घुसकर  मार गिरायेगे।  बार बार  मुहं की खाते , पर फिर लड़ने  आ जाते हो। लो आग हवन की जला दिए, अब आहुति देने आए हैं । तेरे हर कोने कोने पर, तिरंगे को हम लहरायेगे । नस नस में है आग भरी, इनको रोक ना पाओगे । मुमकिन  है विश्व  के नक्शे से,  ये तुमको आज मिटायेगें  । सिंदूर की कीमत क्या होती, ये तुमको आज बतायेगे  ।

मां

 तुम पर क्या मै कविता करू,  मेरे पास शब्दों की कमी सी है।   जब भी सोचती हूं  कभी ,   मां का मेरे लिए  संघर्ष , इन आखों में आज भी,   बिखरी हुई नमी सी है ।   खुद  को भूखा रख जिसने, अपना निवाला मेरे मुख किया । धूप में खुद जल कर भी, मेरे सिर पर छावं किया  । हर पल आगे बढ़ने  का, हौसला भी  मां ने दिया ।   आज जो हूं,जहां हूं, ये सपना भी मां ने दिया । मेरी हर धड़कन कर्जदार  है। मैं  पौधा ,तू मेरी जमी सी है। तुम पर क्या मैं कविता करू, मेरे पास शब्दों की कमी सी है।
  मैं हर पल तुम्हे गुनगुनाता रहूं,    मेरी हर धड़कन कहे राम राम ।   दुनियादारी से बाहर निकल ,      बस जपता रहूं तेरा नाम  । एक पल कभी भी ना भूलूं  तुम्हे,  जीवन की तुम हो सुबह शाम।  राहें कठिन हो,मुश्किल सफर , मैं ना कभी भी किसी से डरू । मेरा भरोसा ,मेरा हौसला बन, मेरे रक्त में बहते रहना तुम राम।  मैं हर पल तुम्हे गुनगुनाता रहूं, मेरी हर धड़कन कहे राम राम।