सच बोल जाते हो

 अगर तुम भूल कर भी, कभी सच बोल जाते हो ।

 अकेले जीने का रस्ता, तुम फिर खोल जाते हो  ।

यहां झूठी फरेबी बात ही, अच्छी मधुर लगती ।

तुम्हारे सच की आहट से, दुनिया भाग जाती है ।

जमाना उस किनारे है, जहां बहरों की दुनिया ।

अगर तुम सच सुनाओगे, बेचारे सुन नहीं सकते ।

वहां जाकर भी खुद को तुम अकेला ही तो पाते हो ।

रिश्तो की चाहत में, हमेशा मुंह की ही खाते हो ।

अकेले जीने का रस्ता, तुम फिर से खोल जाते हो।

अगर तुम भूल कर भी कभी सच बोल जाते हो।

अकेले जीने का रस्ता, तुम फिर खोल जाते हो ।

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