रघुवर कुछ ऐसा हो जाए, मै तेरा सेवक बन जाऊ। तेरे इन पावन चरणो में, सब कुछ अर्पित मै कर जाऊ। सूरज सा तेज शिखर पर हो, मैं दिव्य पुंज सा जल जाऊ । चन्दन सा शीतल मन हो मेरा, जग को मैं शीतल कर जाऊ। निडर बनू और बढता रहूं, हर मंजिल पर मैं चढ जाऊ। राह प्रभु सच का ही चलूं मैं, चाहे उस राह पर मर जाऊ। रघुवर कुछ ऐसा हो जाए, मैं तेरा सेवक बन जाऊ ।
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तेरी हर नापाक सोच को भी, अब हम जड़ से जला देगे। अगर तू बाज ना आया, तुझे नक्शे से मिटा देगें। हमारी भारत माता है, हम इनके बच्चे प्यारे है। निगाहे जब उठाओगे, हम तुमको राख कर देगें। हमारा खून पानी है, अगर तुम ये समझते हो । तुम्हारे खून की नदियां, अब हम भी बहा देगें। अगर तू बाज ना आया, तुझे नक्शे से मिटा देगें
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हमारे गांव का रास्ता, तुम्हारे शहर तक जाता। मगर मेरी ये मजबूरी, मैं तुमसे मिल नहीं पाता। तुम्हें देखा तुम्हें चाहा ,तुम्हें हर बार समझा हूं। पर तेरी जुबां पे आज तक, मेरा नाम ना आता। यही मेरी है मजबूरी, मैं तुमसे मिल नहीं पाता। तुम्हें खुशियों की आदत है, हम गम के भी साथी है। हमारे दर्द का मरहम, यह चेहरा बन नहीं पाता यही मेरी है मजबूरी मैं तुमसे मिल नहीं पाता। हमारे गांव का रास्ता तुम्हारे शहर तक जाता। मगर मेरी ये मजबूरी ,मैं तुमसे मिल नहीं पाता।
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जीवन पथ पर बहुत अधेरा, उजियारा प्रभु करते रहना । मैं नन्हा सा बालक नादान, हाथ पकड़ चलते रहना । कभी थकूं ना मैं चलने से, राहें चाहे जितनी कठिन हो। मेरा हौसला तुम बन जाना, हिम्मत मुझमें भरते रहना। लाख कमाया धन और शोहरत, सब कंकड़ पत्थर जैसे लगते। छोड़ यहां से जब जाना ही है, माया को विलग करते रहना। जीवन पथ पर बहुत अंधेरा , उजियारा प्रभु........….. उजियारा प्रभु करते रहना ।
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फूलों में पला हूं,न सितारों में चला हूं। पतझड़ की मार सहकर, कांटों पे चला हूं। आसां नहीं होता ,ये सफर बड़ा मुश्किल। जिंदा भी रहने वास्ते, जिंदगी से लड़ा हूं। कोई नहीं था आसरा, हर दरवाजे बंद थे। तूफां से लड़ के आज मैं तूफान बना हूं। पतझड़ की मार सहकर, कांटों पे चला हूं। फूलों में पला.....................….......