रघुवर कुछ ऐसा हो जाए,
मै तेरा सेवक बन जाऊ।
तेरे इन पावन चरणो में,
सब कुछ अर्पित मै कर जाऊ।
सूरज सा तेज शिखर पर हो,
मैं दिव्य पुंज सा जल जाऊ ।
चन्दन सा शीतल मन हो मेरा,
जग को मैं शीतल कर जाऊ।
निडर बनू और बढता रहूं,
हर मंजिल पर मैं चढ जाऊ।
राह प्रभु सच का ही चलूं मैं,
चाहे उस राह पर मर जाऊ।
रघुवर कुछ ऐसा हो जाए,
मैं तेरा सेवक बन जाऊ ।
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