मैं उगता सूरज आसमान का,
मुझे कब तलक ढक पाओगे।
तुम तो उड़ते बादल काले,
मुझे कभी मिटा ना पाओगे।
पग पग पर कांटे बिखेर कर,
तुम दूर करोगे मंजिल क्या।
इतनी तो मेरी आत्म शक्ति है,
मैं मंजिल पर चढ़ जाऊंगा।
तुम तो उड़ते बादल काले,
मुझे मिटा ना पाओगे।
मैं उगता सूरज आसमान का,
मुझे कब तलक ढक पाओगे।
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