चूहे जी चले ससुराल
चूहे जी चले ससुराल,
पहन के ऐनक, सूट और टाई ,
बारिश के रिमझिम,मौसम में,
चले कूदते नाली नाला।
बीच बाजार लिए रसगुल्ला ,
चल दिए करते हल्ला-गुल्ला।
मचल उठे रसगुल्ला देख,
खाते चल दिए खुल्लम-खुल्ला।
घंटे भर की मेहनत से,
खाली हाथ पहुंचे ससुराल।
साली उनकी बोली जीजा,
मिठाई क्या नहीं खरीदा।
मुंह बिचका कर बोले जीजा,
बारिश की थी बल्ले बल्ले,
नाली में गिर पड़े रसगुल्ले।
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