न देखा है न समझा  हैं,

मगर दिल में बसे हो तुम।

तेरी भक्ति का नशा है ये,

जब से एहसास में हो तुम।

दुनिया भर के रिश्तो का,

एतबार अब नहीं करता। 

मेरी हर सुबह तुम्ही  से है,

मेरी हर शाम में शामिल हो।

मेरी हर बात में तुम हो,

मेरी हर आस तुमसे है।

मेरे रघुवर मेरे श्री राम,

मेरे कण-कण में बसे हो तुम।

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