फूलों में पला हूं,न सितारों में चला हूं।

पतझड़ की मार सहकर, कांटों पे चला हूं।

आसां नहीं होता ,ये सफर बड़ा मुश्किल।

जिंदा भी रहने वास्ते, जिंदगी से लड़ा हूं।

कोई नहीं था आसरा,  हर दरवाजे बंद थे।

तूफां से लड़ के आज मैं तूफान बना हूं।

पतझड़ की मार सहकर, कांटों पे चला हूं।

फूलों में पला.....................….......


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