दुनिया की परवाह नहीं अब ,
अपनी कृपा मुझ पर तुम रखना।
सोच लिया है, समझ लिया है,
भक्ति के रंग में अब रंगना है।
गलत राह पर मैं ना चलूं कभी,
मुझे राह प्रतिपल दिखलाना ।
अपनी दया की कृपा करो प्रभु,
नहीं बनू मैं खल अभिमानी ।
दया भाव और भक्ति हो तेरी,
यही जमा पूंजी बस मेरी।
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