वक्त बदला मगर ,वक्त फिर वो नहीं।
तुम करीब थे कभी, आज दूरी हुई ।
रोजी-रोटी के चक्कर में, दब सा गया।
वो गुलाबों की खुशबू, भी फीकी हुई।
वक्त बदला मगर, वक्त फिर वो नहीं।
तुम करीब थे कभी ,आज दूरी हुई।
शौक था घर बनाऊं ,बना भी लिया।
बिन तुम्हारे बस , कमरे की जोड़ी हुई।
नौकरी की कशिश थी, मिली तो मगर।
अपनों से दूर होना, ये मजबूरी हुई ।
वक्त बदला मगर, वक्त फिर वो नहीं।
तुम करीब थे कभी, आज दूरी हुई।
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