गिर गिर के जो उठा है, वो मंजिल को पा गया।
जो डर गया वहीं तो आज पीछे रह गया ।
डरना नहीं तुम्हें कसम, तुम्हें भी चलना है।
ठोकर लगे अगर कभी उठ दौड़ पड़ना है ।
तुम हो भविष्य देश के,देश के हो वीर ।
झुकने नहीं देना कभी, माता का अपने सिर।
जिद पे अपने डिगे रहो ,मंजिल को पाओगे।
आज अश्क है मगर, कल मुस्कुराओगे ।
दर्द को भी जिसने, अपना हथियार बनाया।
इतिहास भी उसी का तलब गार बन गया।
जो डर गया वही तो ,आज पीछे रह गया।
गिर गिर के जो उठा है वो मंजिल को पा गया।
जो डर गया वही तो आज पीछे रह गया ।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें