कभी तुम पधारो

 कभी तो जमाने से फुर्सत निकालो,

मेरे भी तो आंगन कभी तुम पधारो। 

उदासी है सड़कों पर पसरा सन्नाटा,

लगता है तुम बिन गुम सा गया हूं।

कभी तो मिलो और मुझसे कहो, 

अकेला कहां तू तेरे साथ मैं हूं।

मेरे भी तो आंगन कभी तुम पधारो।

कभी तो जमाने से फुर्सत निकालो।

 कभी तो मेरे घर भी आ करके देखो ,

बड़ा ही सुहाना मेरे घर का मौसम।

पीपल के पत्तों से बारिश की टप टप,

चिड़ियों की मधुरिम गीतों का सरगम।

मेरे भी तो आंगन कभी तुम पधारो,

कभी तो जमाने से फुर्सत निकालो।

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