कर्ण
सूर्यपुत्र होकर सूत पुत्र कहलाया,
हर द्वार हर गली से तिरस्कार ही पाया।
मैं मित्र को कभी भी धोखा नहीं दूंगा,
जो वचन दिया तुझे, उससे भी न हटूंगा।
ममता भी कुटिल हो गई ,
कभी पुत्र ना कह पाई।
अपने पांच पुत्रों के लिए, आज द्वार मेरे आई।
लो दे रहा वचन कर्ण, तेरे पांच रहेंगे।
अर्जुन या कर्ण में से कोई एक मरेंगे।
लौट जाओ अब, यहां कुछ और ना होगा।
यह युद्ध बिना परिणाम के,खत्म ना होगा।
तुमने अगर पुत्र मुझे मान लिया होता।
सत्य कह रहा हूं मां,यह महाभारत नहीं होता।
प्रियंका विवेक सिंह
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