कृष्ण नाम का अमृत रस है,
जो पिया वहीं अब तक जाना
बचपन में ही कृष्ण नाम से,
खुद को मीरा ने जोड़ लिया।
फिर जग के सारे रिश्तों से,
नाता अपना तोड़ लिया।
जितनी बार मीरा से कृष्ण को,
अलग की कोशिश होती थी।
उतना ही वह कृष्णमय हो,
कृष्ण दीवानी होती थी।
कृष्ण नाम से मीरा को फिर,
विश्व का प्याला दिया गया।
कृष्ण नाम ले विष को पीकर,
खुद को अमर बना डाला।
हार गया राणा का अहं,
इतिहास गवाही देता है।
कृष्ण नाम की महिमा ऐसी,
जो तुम प्रीत लगाओगे।
आज नहीं तो कल तय है,
कृष्ण प्रिये बन जाओगे।
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