नारी तुम शक्ति स्वरूपा हो। 

हर कदम पर दर्द को पीकर ,

अपनों को हरदम सुख देकर ,

नाजुक सी दिखने वाली, 

भावो के रस में बहने वाली ,

नारी तुम अमृत- रूपा हो।

नारी तुम शक्ति स्वरूपा हो।

हर रिश्ते की पहचान तुम्हीं से,

माता-पिता की शान तुम्हीं से,

संगिनी बन कदम बढ़ाती हो,

मां का फर्ज भी निभाती हो, 

नारी तुम तो बहु-रूपा हो।

नारी तुम शक्ति स्वरूपा हो।

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