बेहया के फूल 

 मौसम की हर मार को सह कर,
 बढ़ते खिलते जाते  प्रतिफल ।
जीवन पथ के पथिकों को भी,
 कुछ डगर नई ये दिखाते हैं। 
मिटाने की हर एक कोशिश पर,
  फिर -फिर पनप ये जाते हैं ।
 सुबह सुहानी हवा से मिलकर,
आनंदित होकर मुस्काते हैं ।
बेहया के ये फूल निराले,
जीना सभी  को सिखाते हैं।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

चूहे जी चले ससुराल

मैं खुद से दूर हूं