कोई गिर रहा हो तो मत समझो ,

जीवन उसका अब बुझ जाएगा।

हो सकता है वह गहरी ऊर्जा लेकर, 

नया सूरज खुद ही उगाएगा। 

किसी की भीख से भूख है भली, 

यह वक्त भी यूं गुज़र जायेगा।

दर्द का ये मौसम बदल जाएगा,

मंजिल को पाकर तू मुस्कुराएगा।

मत सोचो कभी हार होगी तेरी,

ये तो आता जाता इम्तिहान है।

गिर गिर के जो उठ रहा, 

 जग में चमका वही इंसान हैं।


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