मेरे  राम 

मेरे अंतर मन में, इस जग के कण-कण में,
           तुम ही जन्मोजन्म से हो राम ।
तेरी ही धुन हो,तेरी ही लय में 
बीते मेरे जीवन की सुबह-शाम 
फूलों में ,कलियों में, बागों और गलियों में,
चिड़ियों के धुन में भी गूंजे सदा तेरा गान।
तेरे चरण की रज से, पत्थर भी इंसान बनें 
कुछ ऐसा ही कर दो प्रभु जपता रहूं तेरा नाम।
जग के अंधेरों से मैं ना डरू,आगे हमेशा बढूं,
नेकी के रास्ते पे चल के  करता रहूं सारे काम ।
मेरे अंतर मन में इस जग के कण-कण में,
             तुम ही जन्मो- जन्म से हो राम।

             

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