मृत्यु 

मृत्यु एक है अटल सत्य, 
इसको झुठला ना पाओगे। 
यह तो है बस कर्मभूमि, 
लौट के घर को आओगे।
पाप पुण्य की नाप जोख में,
उसको कैसे बेवकूफ बनाओगे। 
मृत्यु एक है अटल सत्य, 
इसको झुठला ना पाओगे।
धृतराष्ट्र बन सत्य दबाकर,
कब तक बैठे रह पाओगे। 
लाख कमाओ चाहे जितना, 
कुछ ना साथ ले जाओगे। 
मृत्यु एक है अटल सत्य, 
इसको झुठला ना पाओगे।

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