तप तप कर इस जीवन को,
जो भी दधीचि सा बनाएगा।
आज नहीं तो कल तय है,
वह ही परचम लहरायेगा।
तूफानों सी जिद हो जिसमें,
अंगारों की तपिश भरी हो,
एक रोज यह संभव ही है,
वह अमृत सागर पा जाएगा।
प्रतिपल वेदना सह-सह कर,
नित आगे कदम बढ़ाते जाओ,
जो झुका नहीं हर मुश्किल से,
वह ही इतिहास बनाएगा ।
आज नहीं तो कल तय है,
वह ही परचम लहरायेगा।
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