आज -कल संसार में,

कुछ बात ऐसी हो रही, 

सूरज निकल रहा है, 

   मगर रात हो रही है।

अपनों के नाम पर तो 

रिश्तो का अंबार है। 

कुछ चेहरेअपने लगते हैं ,

पर दिल में व्यापार है। 

प्राणों के बीच आत्मा भी,

घुट -घुट कर सो रही,

लगता है कि मानवता,

किसी कोने में रो रही।

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