मेरी कलम ने क्या लिखा ऐसा,
आजकल पूरा बाजार ही गरम है।
महफिल भरी थी शागिर्दों से,
सब उसकी तारीफों में मशगूल थे ,
मैंने सच जो दिखाया तभी से,
मेरे लिए उसके लफ़्ज़ों में अनल है।
सुकू चाहते हो तो निकल आओ,
हकीकत की पथरीली जमीनों पर,
ईमान बचाकर जो बीते जिंदगी
ईश्वर के लिए यही तो धरम है।
मेरी कलम ने क्या लिखा ऐसा
आजकल पूरा बाजार ही गरम है।
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