सत्य की आग में जल करके, 

  हर अग्नि परीक्षा देता हूं। 

मैं कल भी तप कर सोना था,

मेरी कीमत तो आज भी है।

कोई क्या कहता फर्क नहीं, 

मैं मस्त परिंदा हूं नभ का,

मैं खुद का साथी कल भी था,

मेरी यह आदत आज भी है। 

झुकता हूं बस उसके आगे, 

जो कण कण में बसता है ,

डर के जीता कल भी ना था 

मेरी यह फितरत आज भी है। 

मैं कल भी तप कर सोना था,

मेरी कीमत तो आज भी है।


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