रफ्ता -रफ्ता जिंदगी की,
शाम होने जा रही।
जो भी कुछ है अनकहा,
उसको भी कह दीजिए।
गिले शिकवे के बाजार को,
फैलाओ ना अब इतना।
सब कुछ सवार लो अभी
शाम होने जा रही।
वादों की डायरी में,
कुछ हिसाब जो है अभी।
दिल की आलमारी खोल,
पूरा सब कर लीजिए।
वक्त कब तक थमा रहेगा,
शाम होने जा रही।
रफ्ता- रफ्ता जिंदगी की,
शाम होने जा रही।
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