मनमीत

 मधुर मधुर पायल की रुनझुन,

फिर लेकर आओ मनमीत, 

  मन के तार झंकृत कर दे ,

ऐसा दो जीवन संगीत। 

         प्यासा मन प्यासी यह आंखें,

          तूफानों से चलती सांसे,

         मन मंदिर में घिरा अंधेरा,

         अमर ज्योति जलाओ मीत।

मन के तार झंकृत कर दे ,

ऐसा दो जीवन संगीत। 

        उर में लाखों अरमान लेकर, 

        चलता जाता हूं राहों पर, 

       हाथों में हाथों को देकर,

       कर दो अमर हमारी प्रीत 

मन के तार झंकृत कर दे,

ऐसा दो जीवन संगीत।




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