क्यों 

क्यों हर बार सत्य को ही, 

खुद को साबित करना होता है।

क्यों हर बार बेईमानों को,

ईमानदारी का तमगा मिलता है।

ऐसा क्यों हर बार होता है, 

अग्नि परीक्षा सीता देती हैं। 

मानवता की वेदी पर नित,

सच्चा मन आहुति देता है।

फूंक फूंक कर कदम रखे जो,

उसको ही काटे चुभते हैं। 

भूख प्यास से व्यथित बाल को,

एक नहीं निवाला मिलता है। 

क्यों हर बार सांप को ही,

दूध भरा प्याला मिलता है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

चूहे जी चले ससुराल

मैं खुद से दूर हूं