पिता 

अपने सुख की आहुति देकर, 
बच्चों के लिए जो जीता है। 
मन में लाख दर्द हो लेकिन, 
 कभी व्यक्त न कर पाता है।
अपने खून से सीच सीच कर, 
 बच्चों की खुशियां लाता है।
दुनिया का एक रिश्ता अनोखा, 
जो हिम्मत हम में भर जाता है।
रात रात भर जाग जाग कर, 
 बच्चों का भविष्य सजाता है।
मां के बलिदान से तनिक  कम नहीं,
पिता जो जीवन दाता  है।
निःशब्द हूं तेरे ऋण  के आगे,
 तू जीवन की अमृत गाथा है।





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