मैं
अपनी तलाश में मैं रोज निकल रहा हू,
अंतरमन मे उपजे द्वंद से लड़ रहा हू।
मेरे विचार और है दूसरों के और,
पर समय से आगे मैं बढ़ रहा हू।
नशा है शायद या इश्क है मेरा,
मंजिल की चाह में रोज चल रहा हूं।
सूनेपन से अपना पुराना है वास्ता,
खामोशियों मे अपनी महफिल सजा रहा हूं।
कांटों से भी दोस्ती मैं रखता हूं इस कदर,
जब भी चुभे मुझे तो मैं मुस्कुरा रहा हूं।
Excellent
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