अस्हृय कष्ट सहकर  , जन्म देती हो

  अपनी ममता के आंचल में सुला, 

हर पीड़ा हर लेती हो,

ठोकर  लगने पर पहला दर्द, 

जिसके सीने में हो,

अमृत की मिठास, 

जिसका दुग्ध पीने में हो,

तुम वह निर्मल निश्छल,

ममता मयी नेह से परिपूर्ण,

प्रेम की परिभाषा हो, 

हां मां हां तुम ही तो,

मेरे जीवन का पहला दीप, 

पहली आशा हो।

 

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